भारत सरकार ने लोकसभा में पेश किया सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026
दिनांक: 27 जुलाई 2026
भारत सरकार ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश किया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और धोखाधड़ी को रोकना और परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा कड़ा बनाना है। यह संशोधन मौजूदा कानूनों में सुधार कर परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए लाया गया है।
विधेयक के मुख्य बिंदु
- नकल और धोखाधड़ी पर कड़ी सजा: परीक्षा में नकल करते पाए जाने पर जुर्माना और जेल की सजा बढ़ाई गई है।
- तकनीकी उपकरणों पर प्रतिबंध: मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र में ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
- सुरक्षा और निगरानी: परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरों की अनिवार्य स्थापना और निगरानी बढ़ाई जाएगी।
- सख्त जांच प्रक्रिया: नकल के मामलों की त्वरित जांच और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- शिक्षकों और परीक्षक की जिम्मेदारी: परीक्षकों को अनुचित साधनों की रोकथाम में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
| विशेषता | मौजूदा कानून | संशोधन के बाद |
|---|---|---|
| नकल करने पर सजा | जुर्माना और 6 महीने तक जेल | जुर्माना में वृद्धि और 1 वर्ष तक जेल |
| इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग | कुछ उपकरणों पर प्रतिबंध, सख्ती कम | सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध |
| सुरक्षा निगरानी | सीमित CCTV निगरानी | सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV अनिवार्य |
| परीक्षा नियंत्रकों की भूमिका | कम सक्रिय | प्रशिक्षित और सक्रिय भूमिका |
विधेयक के प्रभाव
यह संशोधन विधेयक भारत में सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल छात्रों में अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही, यह शिक्षण संस्थानों और परीक्षा नियंत्रकों के लिए भी जिम्मेदारी बढ़ाएगा कि वे परीक्षा को निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाएं।
सरकार की घोषणा
इस विधेयक को पेश करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा, "हमारा उद्देश्य है कि हर छात्र को समान अवसर मिले और परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष रहे। नकल और धोखाधड़ी रोकने के लिए यह संशोधन आवश्यक है ताकि हमारे शिक्षा तंत्र की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहे।"
आगे की प्रक्रिया
विधेयक को अब राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा जहाँ इसके विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा और संशोधन हो सकते हैं। इसके बाद, राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह कानून के रूप में लागू होगा।
यह संशोधन विधेयक भारत के शिक्षा क्षेत्र में परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले वर्षों में छात्रों और शिक्षण संस्थानों दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा।
