तारीख: 17 सितंबर 2026

स्थान: नई दिल्ली, भारत

परिचय

भारत सरकार ने 17 सितंबर 2026 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'राष्ट्रीय विज्ञान मिशन' की शुरुआत की घोषणा की। इस मिशन के तहत कुल 2000 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है। यह कदम देश में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

राष्ट्रीय विज्ञान मिशन का उद्देश्य

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचार को प्रोत्साहित करना।
  • युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना।
  • देश में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) गतिविधियों को बढ़ावा देना।
  • इंडिया को वैश्विक विज्ञान मानचित्र पर अग्रणी बनाना।
  • सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को पूरा करने में विज्ञान का योगदान बढ़ाना।

फंड का वितरण और उपयोग

2000 करोड़ रुपये के फंड का उपयोग विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में किया जाएगा। इस फंड का वितरण इस प्रकार होगा:

श्रेणी विवरण फंड आवंटन (करोड़ रुपये में)
अनुसंधान एवं विकास (R&D) नई तकनीकों और नवाचारों के लिए प्रयोगशालाओं और परियोजनाओं को फंडिंग 800
शिक्षा एवं प्रशिक्षण युवा वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए वर्कशॉप, ट्रेनिंग प्रोग्राम 400
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास वैज्ञानिक संस्थानों और रिसर्च सेंटरों की सुविधा सुधारना 500
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग और एक्सचेंज प्रोग्राम 200
अन्य विज्ञान जागरूकता अभियान और पब्लिक आउटरीच प्रोग्राम 100

मिशन के प्रमुख लाभ

  1. वैज्ञानिक अनुसंधान में वृद्धि: बेहतर फंडिंग से भारत में नए शोध और आविष्कार होंगे।
  2. रोजगार के अवसर: विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में नए रोजगार पैदा होंगे।
  3. वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारत विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
  4. सामाजिक और आर्थिक विकास: तकनीकी नवाचार से देश के विभिन्न क्षेत्रों में विकास होगा।

सरकार की प्रतिक्रिया

इस घोषणा पर प्रधानमंत्री ने कहा, "राष्ट्रीय विज्ञान मिशन से भारत के वैज्ञानिकों को नई ऊर्जा मिलेगी और हम विज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाएंगे।"

निष्कर्ष

17 सितंबर 2026 को घोषित यह राष्ट्रीय विज्ञान मिशन भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। 2000 करोड़ रुपये के इस फंड से न केवल अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश के युवा वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को भी नई दिशा मिलेगी। यह पहल भारत को वैश्विक विज्ञान मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिलाने में सहायक होगी।