DRDO की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी
दिनांक: 18 अगस्त 2026
भारत सरकार की रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 18 अगस्त 2026 को 405 सामरिक वस्तुओं की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की है। इस सूची में शामिल वस्तुओं का अनुमानित व्यापारिक मूल्य लगभग ₹3,070 करोड़ है। यह पहल भारत के आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशीकरण के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए की गई है।
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची क्या है?
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में वे वस्तुएं शामिल होती हैं, जिनका उत्पादन भारत में किया जा सकता है और जिनके लिए आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना और विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाना है। DRDO द्वारा यह सूची समय-समय पर अपडेट की जाती है ताकि नई तकनीकों और उत्पादों को शामिल किया जा सके।
छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के मुख्य तथ्य
| वस्तुओं की संख्या | अनुमानित व्यापारिक मूल्य (₹ करोड़ में) | सूची जारी करने की तारीख | उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| 405 | 3,070 | 18 अगस्त 2026 | आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना |
इस सूची का महत्व
- रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता: भारत की रक्षा जरूरतों के लिए घरेलू उत्पादों का विकास और उत्पादन बढ़ेगा।
- आयात पर निर्भरता कम होगी: विदेशी वस्तुओं की जगह स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग बढ़ेगा, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन: छोटे और मध्यम उद्योगों को रक्षा क्षेत्र में अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार सृजन होगा।
- तकनीकी उन्नति: नई तकनीकों का विकास और उनका इस्तेमाल बढ़ेगा, जिससे रक्षा क्षेत्र की क्षमता में वृद्धि होगी।
पिछली सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ
DRDO ने इससे पहले भी पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ जारी की हैं, जिनमें कुल मिलाकर हजारों वस्तुओं को शामिल किया गया है। प्रत्येक सूची के साथ स्वदेशीकरण की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। छठी सूची में शामिल वस्तुएं विशेष रूप से आधुनिक और उच्च तकनीकी सामरिक वस्तुएं हैं।
निष्कर्ष
DRDO द्वारा जारी यह छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सूची न केवल रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि देश के आर्थिक और तकनीकी विकास में भी योगदान करेगी। आने वाले वर्षों में ऐसे प्रयासों से भारत विश्व के अग्रणी रक्षा उत्पादकों में से एक बन सकता है।
